इंडियन पॉवर बैक-अप मार्केट का भविष्य और विकास

प्रणेश चौधरी, फाउंडर तथा सीईओ जनरूफ टेक प्राइवेट लिमिटेड
समूचे भारत में विद्युतीकरण दरों का विस्तार करने की सरकार की पहल, तकनीकी विकास और समग्र आर्थिक विकास के साथ, ऊर्जा की मांग आसमान छू रही है। बिजली की जरूरतों को पूरा करने के बाद क्रिटिकल सिस्टम्स को चलाने के लिए अबाध बिजली पर निर्भर रहना अनिवार्य हो गया है। परिणामस्वरूप, इंडियन पॉवर बैकअप मार्केट भी अर्थव्यवस्था में अपना स्थान बना रहा है। वर्ष 2023 तक, इंडियन पॉवर बैकअप मार्केट 500 अरब रुपये तक पार कर लेगा, ऐसा अनुमान है।
पॉवर बैकअप मार्केट को मोटे तौर पर तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है:
1) डीजल जनरेटर्स
2) यूपीएस और

3) इन्वर्टर्स
डीजल जनरेटर इंडियन पॉवर बैकअप मार्केट का 25% सम्मिलित करता है और 8.1% की सीएजीआर (कंपाउंड एन्युअल ग्रोथ रेट) प्रदर्शित है। टेलीकॉम इंडस्ट्री, डीजल जनरेटर्स के लिए महत्वपूर्ण चालक है, जो स्थापित आधार के 40% से अधिक को सम्मिलित करता है। इसके बाद कंस्ट्रक्शन तथा हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्रीज आती हैं।
यूपीएस मार्केट 11.97% की सीएजीआर प्रदर्शित हुए, इंडियन पॉवर बैकअप मार्केट का 20% सम्मिलित करता है। बढ़ते इंवेस्टमेंट्स तथा आईटी सेक्टर के तेज विकास ने यूपीएस मार्केट में उछाल लाने में योगदान दिया है। इन्वर्टर्स पूरे इंडियन पॉवर बैकअप मार्केट के लगभग आधे हिस्से को सम्मिलित करते हैं, जो 9.33% की सीएजीआर प्रदर्शित करते हैं।
इंडियन इन्वर्टर मार्केट वर्ष 2023 तक 280 बिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इन्वर्टर मार्केट में मांग और वृद्धि को रेसिडेंशियल, कमर्शियल तथा इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में पॉवर बैकअप सॉल्यूशंस की आवश्यकता के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इन्वर्टर्स द्वारा प्रदान किए गए लाभों को ध्यान में रखते हुए, वे अब कोई लक्जरी नहीं; बल्कि बेहद आवश्यक प्रोडक्ट्स हैं। इन्वर्टर टाइप के आधार पर, सेंट्रल इन्वर्टर्स सबसे प्रमुख सेगमेंट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें सबसे बड़ा मार्केट शेयर सम्मिलित होता है। इन इन्वर्टर्स द्वारा दिए जाने वाले लाभों में उच्च दक्षता, कम लागत, विश्वसनीयता और आसान इंस्टॉलेशन सम्मिलित है। स्ट्रिंग इन्वर्टर्स तथा अन्य, सेंट्रल इन्वर्टर्स का अनुसरण करते हैं।
टेक्नोलॉजी में प्रगति के बारे में बात करते हुए, इन्वर्टर तथा यूपीएस सिस्टम्स के रुझान सोलर-बेस्ड सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहे हैं। सोलर-पॉवर्ड इन्वर्टर्स सोलर पैनल्स से बिजली को विनियमित करने के लिए एक अलग सोलर चार्ज कंट्रोलर के साथ आते हैं। साथ ही यूपीएस सिस्टम दो इनबिल्ट चार्जर्स- ग्रिड चार्जर और सोलर चार्जर से लैस है, जो बिजली की विफलता के दौरान तत्काल बिजली की आपूर्ति प्रदान करते हैं।
आजकल, IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) ने इन्वर्टर्स तथा UPS सिस्टम्स के बढ़ते हुए इंटेलिजेंस से उम्मीदें बढ़ा दी हैं। स्टैंडअलोन डिवाइसेस होने के बजाए, ये सिस्टम्स एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के साथ बेहतरी से काम करते हैं। IoT सिस्टम्स, कंज्यूमर्स को आने वाली समस्याओं के बारे में अग्रिम रूप से सचेत कर देते हैं, मेंटेनेंस को सक्षम करते हैं तथा संचालन में आसानी बरतते हैं।
साथ ही, थर्ड-पार्टी मेंटेनेंस सुविधा रिमोट मॉनिटरिंग के माध्यम से 24/7 मेंटेनेंस सर्विसेस की अनुमति प्रदान करती है। इस तरह के एलिवेशन्स के साथ, इन्वर्टर्स आज आकर्षक लुक और इंटेलिजेंट फीचर्स जैसे इंटेलिजेंट कनेक्टिविटी और एक ऐप के साथ जोड़े गए हैं, जो इन्वर्टर स्टेटस, बैटरी स्टेटस, शेष बैकअप आदि प्रदर्शित करते हैं।
जनसोलर का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस विशाल इन्वर्टर मार्केट पर खास पकड़ बनाना है। कीमत और गुणवत्ता पर ध्यान देने के साथ ही इस मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए जनसोलर ने कई सोलर प्रोडक्ट्स पेश किए हैं, जिसमें कई सोलर कॉम्बो भी सम्मिलित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले नागरिकों को भारी बिजली बिलों से मुक्त करना और हर घर में रोशनी प्रदान करना है। भारत में विद्युतीकरण दर का विस्तार करने के लिए सरकार की पहल और तकनीकी विकास से आने वाले वर्षों में इंडियन इन्वर्टर मार्केट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। हम आने वाले वर्षों में इस मार्केट को सर्विस देने की उम्मीद कर रहे हैं।

 

 

 

 

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