केंद्र को अर्णब गोस्वामी के कथित चैट का संज्ञान लेना चाहिए: अनिल देशमुख

मुम्बई। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मंगलवार को कहा कि केंद्र को रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी और ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता के बीच बालाकोट हवाई हमले के सिलसिले में हुए कथित चैट का संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि यह मामला गंभीर है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। बाद में उन्होंने ट्वीट किया कि राज्य सरकार इस मामले पर कानूनी सलाह भी लेगी क्योंकि ‘यह बिल्कुल स्पष्ट है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी योजना की जानकारी थी।
मीडिया में व्यापक रूप से आये इस कथित चैट में कहा गया है कि गोस्वामी को बालाकोट हवाई हमले की जानकारी थी। देशमुख का यह बयान कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा उनसे मुलाकात करने के बाद आया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत की अगुवाई में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल देशमुख से मिला था और उसने उनसे मामले की जांच करने की मांग की। सावंत ने इस सिलसिले में गोस्वामी की तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के बाद देशमुख ने संवाददाताओं सेकहा, ‘‘ यह गंभीर मुद्दा है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। केंद्र को निश्चित ही उसका संज्ञान लेने की जरूरत है। ’’ उन्होंने बाद में ट्वीट किया, ‘‘ हम इस मामले पर कानूनी सलाह भी लेंगे क्योंकियह बिल्कुल स्पष्ट है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी योजना की जानकारी थी।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘ राज्य सरकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।’’ देशमुख को सौंपे एक ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह ‘बड़ी चिंता’ की बात है कि गोस्वामी को न केवल सशस्त्रबलों के राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों के बारे में बहुत ही गोपनीय विषय की जानकारी थी बल्कि वह उसे दासगुप्ता के साथ ‘खुलेआम’ साझा कर रहे थे। कांग्रेस ने सवाल किया कि कैसे गोस्वामी को पाकिस्तान में वायुसेना के सीमा पार हवाई हमले से कई दिन पहले ही कथित रूप से उसकी सूचना मिल गयी। पार्टी ने कहा कि यह शीर्षतम स्तर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौते को दर्शाता है। ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘ हम आपसे अनुरोध करना चाहते हैं कि सशस्त्र बलों के अभियान से कई दिन पहले ही उसके बारे में संवेदनशील एवं गोपनीय सूचना लीक करने की जांच का आदेश दिया जाए और यदि जरूरी समझा जाए तो अर्णब गोस्वामी के विरूद्ध सरकारी गोपनीयता कानून, 1923 के तहत मामला दर्ज किया जाए।’’

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