Sunday, December 5, 2021

क्लाउड किचन शेफर्ड फूड्स ने मुफ्त खाना बांटा

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नई दिल्ली। लॉकडाउन से व्यवसायी भले ही काफी प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों की बहादुरी भरी कोशिशें इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि ‘हम सब साथ हैं’। ऐसा ही एक उदाहरण नई दिल्ली स्थित क्लाउड किचन शेफर्ड फूड्स का है, जो POMP, बर्गर इन माय बॉक्स और डेली सलाद को. जैसे ब्रांड चलाते हैं। शेफर्ड फूड्स इस मुश्किल भरे समय में पूरे दक्षिण दिल्ली में रहने वाले दिहाड़ी श्रमिकों और ज़रूरतमंद समुदायों को मुफ्त भोजन की सेवा प्रदान कर रहा है। शेफर्ड फूड्स एक हफ्ते से ज्यादा समय से एम्स, सफदरजंग अस्पताल और ओखला क्षेत्र के आसपास के बसी झुग्गी बस्तियों में भोजन के पैकेट वितरित कर रहा है। भोजन का वितरण हर दिन दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच लंच के दौरान होता है, जिसमें सभी क्षेत्रों के लोगों को पौष्टिक भोजन का एक बॉक्स दिया जाता है। अपने सहायकों को खुश रखने के लिए, शेफर्ड फूड्स हर रोज़ अपना मेनू भी बदलता है।
इस क्लाउड किचन यह सेवा कम से कम डेढ़ महीने तक जारी रखने का लक्ष्य बनाया है और स्थिति के आधार पर इसे आगे अभी बढ़ाया जाएगा। शेफर्ड फूड्स महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रति व्यक्ति 3 मास्क भी वितरित कर रहा है। फिलहाल, एक दिन में 700 से 800 बॉक्स का कुल वितरण किया जा रहा है और आने वाले कुछ दिनों में इसे बढ़ाकर 1,500 से 2,000 बॉक्स तक करने की उम्मीद है। शेफर्ड फूड्स के सह-संस्थापक, सहज सिंह कुकरेजा ने कहा, “हमारा समाज इस बेहद अप्रत्याशित समय से गुज़र रहा है। हालांकि, सबसे ज्यादा प्रभावित लोग वे हैं, जो समाज के पिरामिड में सबसे निचले स्तर पर आते हैं। वे इस हालात में सबसे कमज़ोर हैं। हमारी फूड डिलीवरी सर्विस यह सुनिश्चित कर रही है कि, हम ज़रूरत के इस समय में अपनी क्षमता के अनुसार हर तरह से उनकी मदद करें। हमारा मानना है कि अगर ज्यादा से ज्यादा उद्यमी उनकी मदद के लिए सामने आएं, तो हम दुनिया को साबित कर देंगे कि वास्तव में सहकारी समाज का क्या मतलब है। हम व्यापार जगत के लीडर्स से दिल से अनुरोध करते हैं कि वे अपने परिचालन संयंत्रों में और उसके आस-पास अपनी क्षमता के अनुसार सबकुछ करें।
”शेफर्ड फूड्स के सह-संस्थापक, तुषार आनंद ने कहा, “शेफर्ड फूड्स मजबूत नैतिक मूल्यों के साथ काम करता है। हमारा मानना है कि कोविड-19 के प्रकोप का असर हमारे समाज के हर व्यक्ति पर पड़ा है, खास तौर पर प्रवासी श्रमिकों और दिहाड़ी श्रमिकों पर। जबकि सरकार अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ कर रही है, हमें भी अपनी ज़रूरतमंद लोगों का समर्थन करने के लिए वह सबकुछ करना चाहिए जो हम कर सकें। हम अपनी पहल का असर देख सकते हैं। हम मानते हैं कि भले ही हमारी कोशिश से किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर बस मुस्कान आए, लेकिन हम कुछ जो भी कर रहे हैं उसके कही ज्यादा मायने हैं।”

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