डोनाल्ड ट्रंप पर अमेरिकी कैपटल में दंगा भड़काने का लगा आरोप

वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महाभियोग मामले की इस हफ्ते सीनेट के समक्ष सुनवाई होनी है। महाभियोग के तहत उनपर छह जनवरी को अमेरिकी कैपटल (संसद भवन) में दंगा भड़काने का आरोप लगाया गया है। ट्रंप के वकीलों ने सोमवार को 78 पन्नों के ज्ञापन में उन कानूनी और तथ्यात्मक दलीलों का विवरण दिया हैं जिन्हें वे सुनवाई के दौरान देना चाहते हैं। वकीलों की दलील है कि ट्रंप ने समर्थकों की रैली को संबोधित करने के दौरान लोगों को दंगे के लिए नहीं भड़काया। बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया है कि सदन के महाभियोग प्रबंधक घंटेभर लंबे ट्रंप के भाषण में से सिर्फ उन्हीं हिस्सों को ले रहे हैं जो डेमोक्रेटिक पार्टी के मामले के लिए मददगार हैं।
वकीलों ने रेखांकित किया कि ट्रंप ने बार-बार अपने समर्थकों से अपील की, वे “शांतिपूर्ण और देशभक्त तरीके से अपनी आवाज उठाएं।“ उन्होंने दलील दी कि ट्रंप की यह टिप्पणी“अगर आप जी-जान से नहीं लड़ते हैं तो आप यह देश खोने जा रहे हैं“–चुनाव सुरक्षा के सामान्य संदर्भ में की गई थी, न कि हिंसा के आह्वान के लिए थी। वकीलों ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तकों ने पहले ही छह जनवरी को हिंसा होने का अंदेशा व्यक्त किया किया था, लिहाजा ट्रंप खुद हिंसा के लिए नहीं उकसा सकते थे। लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य रैली में ट्रंप द्वारा दिए भाषण पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और राष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजों पर सवाल करने वाले ट्रंप के आधारहीन प्रयासों और अपने समर्थकों को उस दिन वाशिंगटन बुलाने के उनके आग्रह को नजरअंदाज कर रहा है जब सीनेट को (मौजूदा राष्ट्रपति) जो बाइडन की जीत की पुष्टि करनी थी। बहरहाल, ट्रंप के वकीलों की दलील यह भी है कि उन्हें संविधान के पहले संशोधन के तहत संरक्षण मिला हुआ था। साथ में उन्होंने यह भी कहा है कि ट्रंप पर महाभियोग चलाना असंवैधानिक है, क्योंकि वह अब पद पर नहीं है।

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