Tuesday, June 28, 2022

दिल्ली में फैक्टरी खुलने के बावजूद फैक्टरी मालिकों में मायूसी

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ए एन शिब्ली
कोरोना ने हर किसी की ज़िन्दगी तबाह कर रखी है। यह दूसरा साल है जब देश में हर तरह की गतिविधियां रुक जाने की वजह से लोग परेशान हैं। जो अमीर लोग हैं उन्होंने किसी तरह अपना काम तो चला लिया है मगर जो आम लोग हैं उनका काम पूरी तरह से ख़राब हो चुका है। देश के दूसरे राज्यों की तरह दिल्ली में हर ग्रुप के लोग परेशान हैं। यहाँ अब जबकि दूसरे साल लॉकडाउन के बाद अनलॉक के अंतर्गत दिल्ली में कंस्ट्रक्शन और फॅक्टरी को खोलने की इजाज़त दे दी गयी है मगर चूँकि इस फैसले में कई ऐसे झोल हैं जिसकी वजह से न तो अनलॉक के बाद बिल्डर खुश हैं और न फैक्टरी मालिक।
नांगलोई में कूलर के कारोबार से जुड़े रिज़वान परवेज़ इन दिनों इस बात से बहुत परेशान हैं कि लगातार दूसरे साल उनका कारोबार पूरी तरह से ठप है। वह कहते हैं पिछले साल तो कुछ भी काम नहीं हुआ और इस बार कुछ हालत बेहतर होने की उम्मीद थी तो वह उम्मीद भी धूमिल हो गयी। रिज़वान कहते हैं पिछले साल जो हमने कूलर बनाया था वह सब ख़राब भी हो गया। उसे ठीक करने में हमारा अतिरिक्त खर्च हो गया। इस बार हम सबकी यह सोच थी कि हम देश भर से आये आर्डर को पूरा कर देंगे मगर इस बार भी हमें मायूसी हाथ लगी।
दिल्ली में अब जबकि फैक्टरी को खोल दिया गया है तो क्या रिज़वान इस से खुश हैं? इस सवाल पर वह कहते हैं, एक तो केजरीवाल जी ने देर से यह फैसला किया और दूसरे उनके फैसले से हमें उस समय तक लाभ नहीं होगा जब तक मार्किट बंद रहेगी। रिज़वान के अनुसार अगर वह फैक्टरी में कूलर बना भी लेते हैं तो उसे बेचेंगे कहाँ ? यह सही है कि कोरोना की वजह से सरकार को बहुत सोच कर फैसले लेने होते हैं मगर ऐसे फैसले से क्या फायदा जिसका किसी को लाभ ही नहीं मिले ? जब दूसरी मार्केट बंद है तो कूलर में लगने वाले सामान कहाँ से खरीदे जायेंगे और मान लिया जाए कि सामन का इंतज़ाम कर भी लिया गया तो जो कूलर तैयार होगा वह आखिर कहाँ बेचा जाएगा ? रिज़वान ने बड़ी मायूसी में कहा कि सरकार लॉकडाउन तो लगा देती है मगर यह नहीं सोचती कि गरीब अपना पेट कैसे पालेंगे ? रिज़वान के अनुसार सरकार तो यह ज़रूर सोचना चाहिए कि लोग सिर्फ बीमारी से नहीं मरते हैं बल्कि बेरोज़गारी के बाद भूखमरी और डिप्रेशन से भी मरते हैं।
फैक्ट्री मालिकों की तरह बिल्डर भी अनलॉक से खुश नहीं हैं। बिल्डर की यह शिकायत है कि एक तो उन्हें मज़दूर नहीं मिल रहे हैं और दूसरे बिल्डिंग से जुड़े मटेरियल की दुकान बंद होने से उन्हें सामान नहीं मिल रहा है। जिस काम का जिस दूकान से सम्बन्ध है अगर वह खुली नहीं है तो कुछ चीज़ों को खोलने और कुछ को बंद रखने से कोई खास फायदा नहीं होगा।

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