Sunday, January 29, 2023

नीति आयोग और मास्टर कार्ड ने “कनेक्टेड कॉमर्स  : क्रिएटिंग ए रोडमैप फॉर ए  डिजिटली इंक्लूसिव भारत” पर रिपोर्ट रिलीज की

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नीति आयोग और मास्टरकार्ड ने आज संयोजित वाणिज्य की दिशा में डिजिटल समावेशी भारत की रूपरेखा के सम्बन्ध में “कनेक्टेड कॉमर्स : क्रिएटिंग ए रोडमैप फॉर ए डिजिटली इंक्लूसिव भारत” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में भारत में डिजिटल वित्तीय समावेशन को तेज करने की समस्याओं को चिन्हित किया गया है और देश के 130 करोड़ नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाने की अनुशंसाएं की गई हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार, सीईओ अमिताभ कांत, आर्थिक और वित्तीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और जाने-माने विशेषज्ञ अजित पै के साथ मास्टर कार्ड में ग्लोबल कम्युनिटी रिलेशंस के ग्रुप हेड और वरिष्ठ उपाध्यक्ष  रवि अरोड़ा ने संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट रिलीज की।
अक्टूबर और नवंबर 2020 में संपन्न पाँच दौर के गोलमेज सम्मलेन पर आधारित यह रिपोर्ट नीति निर्माण पर मुख्य मुद्दों और अवसरों को उनके अनुमान, नतीजों या सिफारिशों के साथ उजागर करती है। रिपोर्ट  में कृषि,  लघु व्यवसाय (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग), शहरों में आवागमन के साधनों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर नीति बनाने और क्षमता निर्माण की सिफारिश की गई है। नीति आयोग के नेतृत्व में मास्टर कार्ड के सहयोग से किए गए इस विचार-विमर्श में सरकारी, बैंकिंग सेक्टर, फाइनेंशनल रेगुलेटर, फिनटेक उद्यमों और इकोसिस्टम के कई इनोवेटर्स ने हिस्सा लिया।  नीति आयोग इस प्रयास में नॉलेज पार्टनर था। बिजनेस एडवाइजरी फर्म एफटीआई कंसलटिंग ने वर्कशॉप की सीरीज और इसके नतीजे की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में गोलमेज सम्मलेन के दौरान हुए विचार-विमर्श की झलक मिलती है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा कि, “टेक्नोलॉजी लगातार बदलती रही है, जिससे लोगों को फाइनेंशियल सर्विसेज तक बेहतर और आसान पहुँच मिलती है। भारत में वित्तीय सेवाओं का डिजिटाइजेशन बढ़ता जा रहा है। अब उपभोक्ता कैश की जगह कार्ड, वॉलेट्स, ऐप्स और यूपीआई रखने लगे  हैं। इस रिपोर्ट में कई प्रमुख सेक्टरों और क्षेत्रों पर फोकस किया गया है, जिसमें सभी को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उनका डिजिटाइजेशन करने की सख्त जरूरत है।”
विशेषज्ञों ने अक्टूबर और नवंबर के बीच वित्तीय सेवाओं के डिजिटाइजेशन में सभी लोगों को शामिल करने के काम में तेजी लाने के लिए कई तरीकों पर चर्चा की। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से जुड़े कारोबारियों को दुनिया भर में बेहतरीन अवसरों का लाभ उठाने के काबिल बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा डिजिटल कॉमर्स या ट्रांजेक्शन में लोगों का भरोसा जगाने के साथ डिजिटल रूप से वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। भारत में कृषि क्षेत्र के उद्यमों को कनेक्टेड कॉमर्स के लिए तैयार करने के विषय पर भी गहन मंथन किया गया। चर्चा में स्मार्ट सिटीज के लिए मजबूत यातायात के साधनों की संभावना को भी खंगाला गया। नॉलेज सीरिज के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें से कुख्य प्रमुख विषय इस प्रकार हैं :

  1. भारतीय समाज में रहने वाले गरीबों और अल्प आय वर्ग के लोगों को डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम में शामिल करने में तेजी।
  2. लघु और मध्यम उद्योगों से भुगतान लेने या उन्हें भुगतान करने, पूँजी हासिल करने, डिजिटल होने और ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुँचने की सुविधा देने और इस क्षेत्र में लगातार लचीलापन सुनिश्चित करने के उपाय।
  3. डिजिटल ट्रांसजेक्शन के प्रति लोगों में भरोसा जगाने और साइबर लचीलापन बढ़ाने के लिए नीतिगत और तकनीकी मध्यवर्तन के उपाय।
  4. भारत के कृषि क्षेत्र में डिजिटाइजेशन की संभावनाओं की खोज।
  5. सभी नागरिकों को ट्रांजिट सुलभ कराने के लिए डिजिटल खाके के अनिवार्य घटक।

 नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि,  “कोरोना के बाद के युग में लचीले सिस्टम का निर्माण कर  बिजनेस मॉडल को प्रोत्साहित करना भविष्य में अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। भारत डिजिटल फाइनेंशिल सर्विसेज के एक हब के रूप में उभर रहा है। यूपीआई जैसे सोल्यूशन को लोग काफी तेजी से अपना रहे हैं। सभी को अफोर्डेबल डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने में यूपीई की प्रामाणित उपयोगिता को काफी सराहा गया है। फिनटेक इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ पारंपरिक रूप से फाइनेंशल सर्विस प्रोवाइडर्स अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे विभिन्न इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारियों की कर्ज लेने की सुविधा तक आसानी से पहुंच उपलब्ध होगी। इससे हम भारत के डिजिटल ट्रांसजेक्शन की सुविधा को सभी के लिए आसान और सुरक्षित बनाने में सक्षम हो सकेंगे और यह सभी के लिए सुलभ होगी।”
इस रिपोर्ट की महत्वपूर्ण सिफारिशों में निम्नलिखित शामिल हैं :

  1. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को समान अवसर देने के लिए भुगतान के ढांचे को मजबूत बनाना।
  2. सूक्ष्म, लघु और मँझोले उद्योगों को विकास के अवसर मुहैया कराने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और अनुपालन की प्रक्रिया का डिजिटाइजेशन करना।
  3. पेमेंट में धोखाधड़ी के मामलों पर निगरानी रखने के लिए “फ्रॉड रिपॉजिटरी” सिस्टम बनाने समेत सूचना के आदान-प्रदान का सिस्टम बनाना। ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी के खतरों से उपभोक्ताओं को सतर्क करने की चेतावनी देने की प्रणाली सुनिश्चित करना।
  4. कृषि क्षेत्र में काम कर रही नॉन बैंकिंग फाइनेंशल कंपनियों को कम ब्याज दर पर पूंजी प्राप्त करने की क्षमता देना और दीर्घकालीन अवधि में बेहतर डिजिटल नतीजे हासिल करने के लिए फिजिटल (फिजिकल + डिजिटल) मॉडल बनाना। लैंड रेकार्ड का डिजिटाइजेशन करना इस क्षेत्र के तेजी के विकास करने में अहम भूमिका निभाएगा।
  5. न्यूनतम भीड़ और लाइनों के साथ सभी को शहर पारगमन के साधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना, मौजूदा स्मार्टफोन और कॉन्टेक्टलेस कार्ड का लाभ उठाना और लंदन ‘ट्यूब’ जैसी समावेशी, अंतर-परिचालनीय और खुली व्यवस्था का लक्ष्य तय करना।
    मास्टर कार्ड, एशिया पैसिफिक के सहअध्यक्ष अरि सरकार ने बताया कि, “कोरोना महामारी ने  हम सभी को कैश सिस्टम के काफी नाजुक होने और डिजिटल ट्रांसजेक्शन की तकनीक के लचीलेपन के प्रति सतर्क किया है, जिसमें डिजिटल पेमेंट भी शामिल है। प्रतिबंधों के बावजूद अपनी मूलभूत आजीविका की जरूरत पूरी करने के लिए व्यापार और वाणिज्य बेहद जरूरी है। डिजिटल टेक्नोलॉजी ने ही इसे संभव बनाया था। अब फिजिकल रूप से मौजूद व्यावसायिक संस्थानों के वितरण नेटवर्क को पहले से कहीं अधिक डिजिटल वर्ल्ड के समानांतर हो जाना चाहिए। पिछले कुछ सालों से भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन सभी के लिए सुलभ और आसान हो गया है। भारत दुनिया के सबसे एडवांस डिजिटल पेमेंट के माहौल वाले देशों में से एक हो गया है। अब हमें इससे सबक सीखने और पूरी रफ्तार से बड़े पैमाने पर डिजिटल रूपांतरण अपनाने का समय आ गया है। इस रिपोर्ट से डिजिटल रूपांतरण की रूपरेखा के उन प्रमुख तत्वों के उजागर होने की उम्मीद है, जिन्हें अपनाकर भारत अगले स्तर के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। इससे समाज के हाफ बिलियन लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन की सही कीमत पता चलेगी, जिससे वह ऑनलाइन होकर अगले तीन सालों में डिजिटल ट्रांजैक्शन को अपना सकेंगे।”

 

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