Sunday, September 25, 2022

राम मंदिर निर्माण के लिए फंड जमा करने की मुहिम में बल और हिंसा पर रोक लगाने की मांग

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नई दिल्ली। देश के प्रमुख संगठनों और व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर देशभर में राम मंदिर के लिए फंड जमा किए जाने की मुहिम के दौरान ज़ोर-ज़बरदस्ती करने और शांति भंग पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि राम मंदिर के लिए फंड जमा करने वाले कार्यकर्ता की तरफ से बहुत से संवेदनशील इलाक़ों में शांति और पारस्परिक सामाजिक संबंध को खत्म करने वाली गतिविधियां अंजाम दी जा रही हैं। अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए फंड जमा करने की मुहिम 25 दिसम्बर 2020 को मध्यप्रदेश से शुरू हुई थी जिसके नतीजे में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए । इस हिंसा ने प्रदेश के चार ज़िलों मंदसौर, चंदन खेड़ी (इंदौर), उज्जैन और राजगढ़ को अपने लपेटे में ले लिया। इसकी वजह से जीरापुरा मोहल्ला में सरकारी और निजी संपत्तियों की बड़े पैमाने पर तबाही हुईं, निर्दोषों की जाने गयीं और बहुत से लोग ज़ख्मी हुए। इस हिंसा के बावजूद 15 जनवीर 2021 से राज्य सरकार की ओर से मालवा क्षेत्र में ज़ोर ज़बर्दश्ती की यह मुहिम चलाई गयी थी। सच तो यह है कि इस तरह की बातों से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और तनाव के वातावरण का मार्ग दर्शन किया गया। इसी तरह विगत सप्ताह एक दूसरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें राम मंदिर के लिए फंड जमा करने लिए मोटर साइकिल रैली के दौरान विशेष समुदाय के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक बातें करते हुए दिखाया गया है। ये रैली विश्व हिन्दू परिषद की ओर से उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर और शिकारपुर में आयोजित की गई थी। इतना ही नहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के गोपाल्या ने विधायक प्रीतम गौड़ा और बीजेपी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बीरहनाहल्ली और शिवामोग्गा में अपनी संवैधनिक ज़िम्मेदारियों को भूलते हुए घर घर जाकर फंड देने की अपील की। इस मौक़ा पर नारे लगाए जा रहे थे और जानबूझ कर खास इलाक़े के रास्ते चुने गए जिससे संदेह को बल मिलता है और इस तरह की गतिविधियों के असल उद्देश्यों की तरफ इशारा होता है और ऐसा महसूस होता है कि फंड जमा करने से अधिक समाज को सांप्रदायिकता की बुनियादों पर बांटना है। इन तत्वों के ज़रिए खासतौर पर मुस्लिम समुदाय एवं अन्य सभी लोगों में उत्पीड़न, उत्तेजना और भय का वातावरण पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। पत्र में मांग की गयी कि प्रस्तावित राम मंदिर के लिए ज़ोर ज़बर्दश्ती से राशि जमा करने के ख़िलाफ़ तुरंत और उचित कार्रवायी की जाए। पत्र में यह भी कहा गया कि शांति और व्यवस्था बनाये रखने वाले प्राधिकरण की ज़िम्मेदारी है कि वे इस बात को यक़ीनी बनायें कि फंड जमा करने की मुहिम में कोई बल और सांप्रदायिक उन्माद का प्रयोग न हो।
हस्ताक्षरकर्ताओं में औल इंडिया मुशावरत के अध्यक्ष नवेद हामिद, इमारत शरिया बिहार के प्रबंधक मौलाना वली रहमानी, इत्तिहादे मिल्लत काउंसिल बरैली शरीफ के मौलाना तौक़ीर रेज़ा खान, जमाअत इस्लामी हिन्द के अमीर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, जमीयत अहले हदीस के अमीर असगर इमाम मेहदी, आईओएस के चेयरमैन डॉक्टर मनज़ूर आलम, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉक्टर ज़फ़रुल इस्लाम खान, दक्षिण एशिया ह्युमन राइट्स के एक्ज़िक्युटिव डॉयरेक्टर रवि नायर, शिक्षा विशेषज्ञ राम पुनियानी, दिल्ली विष्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद, एआईएमपीएलबी के सचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, शिया जामा मस्जिद दिल्ली के खतीब मौलाना मोहसिन तक़वी, जमीयत ओलमा दिल्ली स्टेट के अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुर्रज़्ज़ाक, पीयूसीएल की कविता श्रीवास्तव, एफडीसीए के जेनरल सेक्रेट्री मोहम्मद सलीम इंजीनियर, गुजरात के वंकेश ओझा, राजस्थान के सवाई सिंह और शिक्षा विशेषज्ञ अम्ब्रेश राय के नाम शामिल हैं।

 

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