Tuesday, December 7, 2021

समलैंगिकता पर आधारित है ‘अल्मारियां’ : प्रणव सचदेवा

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मुंबई। ‘जिंदगी डॉट कॉम’, ‘अगर तुम साथ हो’ जैसे टीवी सीरियल, ‘हद’, ‘दिल्लीवुड’, ‘माया 2’, ‘अनफ्रेंड’ जैसी वेब सीरीज के साथ कई विज्ञापन फिल्मों में काम कर चुके प्रणव सचदेवा इन दिनों अपनी नई लघु फिल्म ‘अल्मारियां’ को लेकर चर्चा में है। ‘एफएनपी मीडिया’ की जिया भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस लघु फिल्म में प्रणव के साथ राजेश शर्मा व सुप्रिया शुक्ला भी हैं। ‘अल्मारियां’ में अपने किरदार के बारे में प्रणव का कहना है कि फिल्म ‘अलमारियां’ चूंकि समलैंगिकता जैसे दुरूह सब्जेक्ट पर आधारित है, इसलिए इस भूमिका के लिए मेरी तैयारी शारीरिक से अधिक आंतरिक थी। न केवल एक अभिनेता के रूप में, बल्कि एक इंसान के रूप में भी मुझे बहुत सारी आत्म-परामर्श करनी पड़ी और समलैंगिकता को लेकर खुद को शिक्षित करना पड़ा। मेरे लिए यह काम कतई आसान नहीं था, लेकिन एक एक्टर के तौर पर मैंने चैलेंज लिया। हालांकि, मुझे नहीं पता कि मैंने एक अभिनेता के रूप में इस फिल्म में कैसा काम किया है, लेकिन मैं निश्चित रूप से इस फिल्म को करने के बाद एक व्यक्ति के रूप में खुद में परिवर्तन महसूस करता हूं।
इस शॉर्ट फिल्म से जुड़ने के बारे में पूछने पर प्रणव बताते हैं कि मैं अजय कृष्णन द्वारा लिखित ‘कमिंग आउट’ नामक लघु नाटक का निर्देशन कर रहा था और मैं अक्सर सोचा करता था कि इस नाटक की कहानी पर फिल्म बननी चाहिए। ‘अल्मारियां’ की निर्देशक जिया बॉलीवुड की उन बेहतरीन लेखकों में से एक हैं, जिन्हें मैं जानता हूं। बता दूं कि हम और जिया एक—दूसरे को कॉलेज के जमाने से जानते हैं। जिया एक बेहतरीन सहयोगी, रचनात्मक सहयोगी और मेरी सबसे अच्छे दोस्तों में से एक है। वह अपने अभिनेताओं को बेहद प्यार और सहज महसूस कराती है। इसलिए मैंने इस नाटक की कहानी के साथ उनसे संपर्क किया। उन्हें कहानी पसंद आई तो उन्होंने ‘कमिंग आउट’ पर फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी। संयोग देखिए कि उन्होंने मुझे ही इसमें समलैंगिक बेटे का किरदार निभाने का अवसर दे दिया।
प्रणव इस फिल्म में सुप्रिया शुक्ला और राजेश शर्मा के साथ काम कर रहे हैं। इन कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव के बारे में वह बताते हैं, ‘सुप्रिया जी के साथ काम करने के लिए एक ट्रीट है। वह बहुत ही सहयोगी सह-अभिनेत्री हैं। राजेश जी पूरी तरह से प्रोफेशनल एक्टर हैं, जिनके पास वर्षों का अनुभव है। वह भी थियेटर से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, शुरू में उनके साथ काम करने को लेकर थोड़ा नर्वस जरूर था, लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार से मुझे सहज बना दिया।’ कोरोनाकाल ने जहां मनोरंजन जगत को बुरी तरह प्रभावित किया है, फीचर फिल्में रिलीज नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में क्या लघु फिल्मों का क्या भविष्य देखते हैं? इस पर प्रणव कहते हैं, ‘आज का जमाना शॉर्टकट का है। हम माइक्रोवेव वाली पीढ़ी हैं, जिसे सब कुछ बहुत जल्दी चाहिए। यही वजह है कि आज लोग लंबी फिल्मों के बजाय लघु फिल्में ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में लघु फिल्मों का भविष्य मुझे तो उज्ज्वल नजर आता है। लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि कम समय में बेहतरीन कहानी पेश की जाए।

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