Sunday, December 5, 2021

ज़रूरतमंदों की मदद के लिए हर समय तैयार मोहम्मद वाजिद और उसकी टीम

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ए एन शिब्ली
इस वक़्त पूरा देश संकट में है। कोरोना ने लाखों लोगों को लाचार कर दिया है। किसी की नौकरी चली गयी है तो किसी को खाने तक के लाले पड़े हुए हैं।  संकट की इस घड़ी में जो एक सबसे अच्छी बात सामने आयी है वह यह कि पूरे देश में हर जगह युवाओं का ग्रुप अपने अपने तौर पर और अपनी अपनी हैसियत के अनुसार हर संभव ज़रूरतमंदों की मदद कर रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में भी ऐसे बहुत से युवा हैं जो दिन रात मेहनत करके ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही एक युवा हैं दक्षिण दिल्ली के जामिया नगर में रहने वाले मोहम्मद वाजिद। वाजिद राह -ए -सलफ फाऊंडेशन के बैनर तले यह काम अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने युवाओं की एक टीम बनायीं हुई है जो घर घर जा कर लोगों को राशन पहुंचा रही है। आम तौर पर राशन की मदद करने वाले लोग ज़रूरतमंदों को किसी एक जगह बुला कर उन्हें मदद देते हैं लेकिन वाजिद और उसकी टीम के साथ एक खास बात यह है कि यह लोग ज़्यादा तर मामलों में खुद ही घर घर जा कर मदद करते हैं।
अज़ाद एक्सप्रेस से बात करते हुए वाजिद ने बताया कि इस्लाम की यह शिक्षा है कि दूसरों की मदद की जाये ऐसे में अगर संकट के इस समय में हम लोगों के काम नहीं आएंगे तो भला कब आएंगे। वाजिद ने बताया कि पिछले कई महीनों से हम लोग, लोगों को राशन तो  दे ही रहे हैं इसके अलावा हमने ज़रुरत पड़ने पर लोगों के लिए दवा का भी इंतज़ाम किया , लोगों को ऑक्सीजन भी दिलवाई और अस्पताल में एडमिट कराने में भी मदद की। वाजिद और उसकी टीम ने सिर्फ जामिया नगर में ही लोगों की मदद नहीं की है बल्कि वह दिल्ली के विभिन्न इलाक़ों के अलावा नॉएडा , फरीदाबाद  और गुड़गांव में भी पहुंचे हैं और ज़रूरतमंदों तक मदद का हाथ बढ़ाया है। दिल्ली के बटला हाउस में रहने वाली सकीना ने बताया कि मैं उस वक़्त हैरान रह गयी जब मेरे एक जानने वाले ने बताया कि तुम्हें एक आदमी राशन देने आएगा , उनके कहने के आधे घंटे के अंदर ही राशन मुझे मिल गया। सकीना को उस बात की ख़ुशी थी कि बहुत से लोग मदद करते हैं मगर कभी कभी काफी समय तक लाइन में लगे रहने के बाद मदद मिलती है, मगर वाजिद साहब ने तो मुझे मेरे घर पर राशन पहुंचा दिया।
वाजिद के अनुसार यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम दूसरों के काम आएं। वाजिद ने आज़ाद एक्सप्रेस से एक खास बात यह कही कि कुछ लोग तो खुल कर कुछ मांग लेते हैं मगर संकट की घड़ी में वह लोग काफी परेशान रहते हैं जो इज़्ज़त की वजह से किसी से मांगने से शर्माते हैं , हमें ऐसे लोगों को तलाश कर उन तक मदद पहुँचाने की ज़रुरत है।

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