ए एन शिब्ली
नई दिल्ली। गीता पर 11.5 लाख शब्द लिखकर इतिहास रचने वाले डॉ. राजेश तक्यार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में द *बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स* ने सम्मानित किया। उन्हें *श्रीमद्भगवद्गीता* पर *18 खंडों* की पुस्तक श्रृंखला पूरी करने के लिए यह सम्मान मिला, जिसमें व्याख्या, विवेचन और टीका के रूप में *11.5 लाख से अधिक* शब्द हैं। ख़ुशी के इस अवसर पर राजेश तक्यार के खास दोस्त मंगल नसीम और उनकी फॅमिली के सभी खास सदस्य मौजूद थे। यह सम्मान डॉ. तक्यार की साहित्यिक यात्रा का एक अहम पड़ाव है। वे हिंदी और अंग्रेज़ी में 40 से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके हैं, जो भारतीय दर्शन, अध्यात्म, आत्मज्ञान और व्यक्तित्व विकास पर आधारित हैं।
इस 18 खंडों की परियोजना में गीता के हर अध्याय पर अलग पुस्तक लिखी गई है। लेखक द्वारा रखे गए विस्तृत शब्द-गणना रिकॉर्ड के अनुसार, पूरे संग्रह में कुल 1,151,853 शब्द हैं। इनमें गीता की शिक्षाओं को आज के पाठकों के लिए व्याख्या और चिंतन के रूप में समझाया गया है। इस अवसर पर डॉ. राजेश तक्यार ने कहा, “भगवद्गीता सिर्फ पढ़ने या पूजने वाला ग्रंथ नहीं है। यह कर्तव्य, ज़िम्मेदारी, चुनाव और मानव जीवन के उद्देश्य जैसे सवाल उठाती है, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। मेरा मकसद इन शिक्षाओं को सरल भाषा में समझाना था, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग, खासकर युवा पाठक, इन्हें समझ सकें और इन पर विचार कर सकें। 11.5 लाख शब्द वर्षों के अध्ययन और लेखन का नतीजा हैं, लेकिन मेरे लिए असली उपलब्धि तब होगी जब और ज़्यादा लोग गीता पढ़ें और उसके ज्ञान को अपने जीवन में उतारें।”
डॉ. तक्यार का जन्म 1955 में जालंधर में हुआ और उनकी परवरिश नई दिल्ली में हुई। उनके लेखन की यात्रा उनके निजी अनुभवों और भारतीय दार्शनिक परंपराओं में उनकी लंबे समय की रुचि से गढ़ी गई है। उन्होंने काम करते हुए अपनी पढ़ाई का खर्च उठाया और दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स की पढ़ाई की। वे इस अनुभव को अक्सर लगन और आत्मनिर्भरता के महत्त्व से जोड़ते हैं। उनकी रुचि सिर्फ गीता तक सीमित नहीं है। वे वेद, पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने लेखन, प्रकाशन और डिजिटल मंचों के ज़रिए आध्यात्मिक साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया है।
डॉ. तक्यार अब भी जोश में हैं और आगे भी किताबें लिखते रहना चाहते हैं। आज़ाद एक्सप्रेस के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नौजवानों को चाहिए वह इस किताब को ज़रूर पढ़ें जो सबको जीवन जीने का तरीक़ा सिखाती है।
गीता पर 11.5 लाख शब्द लिखकर डॉ. राजेश तक्यार ने रचा इतिहास, द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने किया सम्मानित

स्रोत: AN Shibli

