Wednesday, November 30, 2022

भारत को एकजुट करने के लिए धर्म गुरुओं ने लिया संकल्प

Must Read

नई दिल्ली। धार्मिक घृणा और इस्लामोफोबिया को भारत की धरती से समाप्त करने और भारतीयता एवं मानवता की वास्तविक भावना को उजागर करने के लिए के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वाधान में उसके दिल्ली स्थित मुख्यालय के मदनी हॉल में ’सद्भावना संसद’ का आयोजन किया गया। यह संसद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के संरक्षण में देश भर में आयोजित होने वाली एक हजार सद्भावना संसदों की एक कड़ी है। इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के विभिन्न स्थानों पर भी सद्भावना संसदों का आयोजन किया गया जिसमें सभी धर्मों ने गुरुओं ने भाग लिया और संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश दिया।
नई दिल्ली में आयोजित सद्भावना संसद में एकता और आपसी भाईचारे का मनमोहक दृष्य देखने में आया। जाने-माने हिंदू धर्मगुरु श्री बाबा सिद्धजी महाराज, सर्वसंचालक गौशाला नोएडा ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि भारत का समाज हिंदू और मुसलमान, दोनों की व्यवस्थाओं के मेलजोल से बना है, जो व्यक्ति चाहे वह किसी मंदिर का पुजारी हो या किसी मस्जिद का इमाम, अगर वह समाज को तोड़ने की शिक्षा देता है, तो वह असामाजिक तत्व है। ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद कर देना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि सभी भारतीयों के पूर्वज एक थे और सभी का सम्बंध इसी देश की मिट्टी से है। इसलिए एक दूसरे को अपनी ताकत मानें और अपने पूर्वजों की आत्माओं को खुश करने के लिए एकता और सद्भाव स्थापित करें।
अपने उद्घाटन भाषण में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि सद्भावना संसद का यह दूसरा चरण है। पिछले महीने हमने सौ से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए थे। इस बार भी देश के कई भागों में कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद को यह गौरव प्राप्त है कि उसने राष्ट्रीय एवं समाजी आंदोलन में हमेशा सहयोग और एकजुटता के साथ काम किया है और इस उद्देश्य के लिए धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुत ही खूबसूरत देश है। इसकी प्रतिष्ठा और महानता इस तथ्य में निहित है कि यहां सभी धर्मों के लोग सदियों से एक साथ रह रहे हैं। उनके घर और आंगन एक-दूसरे से मिले-जुले हैं। इसलिए इस देश में नफरत फैलाने वाले कभी कामियाब नहीं होंगे। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया कि किस तरह एक गैर-मुस्लिम नवीन चंद बल्लभ भाई भाटिया ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जमीयत के कल्याणकारी कार्यों के लिए अपनी जमीन दान कर दी थी।
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि मुझे एक भारतीय मुसलमान होने के नाते यह कहना है कि मुझे किसी से सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है। मुझे गर्व है कि भारत मेरी मातृभूमि है और पैतृक भूमि भी, क्योंकि अबुल-बशर (प्रथम मानव) आदम के माध्यम से सत्य का संदेश सबसे पहले इसी भूमि पर आया था। उन्होंने इस अफवाह का जवाब दिया कि मुसलमान इस देश में एक हजार साल से होते हुए भी अल्पसंख्यक हैं, फिर वह आने वाले वर्षों में बहुसंख्यक कैसे हो सकते हैं। जो भ्रम फैलाना चाहते हैं, वह वास्तव में इस देश से प्यार नहीं करते हैं। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की प्रशंसा की कि उसने आज के अंधकार भरे दौर में प्यार का दीप प्रज्जवलित किया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने कहा कि जहां यह सच्चाई है कि धर्म लोगों को जोड़ने और एकजुट करने की शिक्षा देता है, वहीं यह भी कटु सत्य है कि आज धर्म को ही आधार बनाकर कुछ लोग नफरत और सांप्रदायिकता पैदा कर रहे हैं। इसलिए यह समय की मांग है कि सच्चे धार्मिक लोग इन तथाकथित झूठे धार्मिक लोगों को बेनकाब करें और अपना कर्तव्य समझ कर उनके खिलाफ संयुक्त आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अमन-शांति और प्रेम के संदेश का ही परिणाम है कि आज मोहन भागवत जी भी मैदान में आए हैं। इसलिए जरूरत है कि स्थानीय स्तर पर धार्मिक लोगों का एक समूह गठित हो जो आपकी समस्याओं का समाधान करे। इसी उद्देश्य के लिए जमीयत सद्भावना मंच का गठन भी किया गया है।
श्री हरजोत सिंह जी महाराज हल्द्वानी ने कहा कि सभी धर्म गुरुओं को सत्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए क्योंकि आज बुराई और झूठ, धर्म के चोले में छिपे हुए हैं। इस अवसर पर जमीयत सद्भावना मंच के संयोजक मौलाना जावेद सिद्दीकी कासमी ने सद्भावना संसद का दस सूत्रीय संकल्प पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया है कि (1) देश और समाज की सेवा, सुरक्षा एवं विकास कार्यों के लिए सदैव हम सब तत्पर रहेंगे (2) राजनीति और धर्म के मामले में टकराव की स्थिति से बचेंगे (3) चाहे हम किसी भी धर्म के अनुयायी या राजनीतिक दल के मतदाता हों लेकिन देश में सद्भावना को मजबूत करने में एकजुट रहेंगे (4) किसी धर्म एवं धर्मगुरुओं पर किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी, गलत बात या ओछे शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे (5) अगर कहीं पर भी साम्प्रदायिक वातावरण खराब होता है तो फौरन हम सब विशेष रूप से क्षेत्र की साझा कमेटी आपस में मिल-बैठ कर मामले का समाधान कराने की कोशिश करेंगे (6) धर्म एवं समुदाय के भेदभाव के बिना गरीब और परेशान लोगों की मदद खुले दिल से करेंगे (7) अपने-अपने क्षेत्रों में सद्भावना के कार्यक्रम आयोजित करेंगे (😎 जिला और शहरों के चौराहों पर सद्भावना कैंप लगाएंगे (9) जगह-जगह सद्भावना यात्रा निकालेंगे (10) मानवता का संदेश देंगे और उसकी भावना लोगों में मजबूत करेंगें।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
Latest News

अवादा फाउंडशेन ने मथुरा के पांच विद्यालयों को अगीकृत किया

मथुरा। अवादा ग्रुप की समाज कल्याण संस्था, अवादा फाउंडशेन ने अपने उत्कृष्ट शिक्षा अभियान का प्रारंभ मथुरा के राजकीय...
- Advertisement -spot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_img